Home राष्ट्रिय किसान आन्दोलन के बीच मुख्यमंत्री शिवराज ने उपवास खत्म करने का पहले...

किसान आन्दोलन के बीच मुख्यमंत्री शिवराज ने उपवास खत्म करने का पहले ही कर लिया था इंतजाम

63
SHARE

भोपाल | 10 जून को भोपाल के दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास के लिए बैठे थे. उन्होंने घोषणा की थी की जब तक राज्य में शांति बहाली नही हो जाती वो अपना उपवास नही तोड़ेंगे. उस दिन बीजेपी के कई बड़े नेता, सभी राज्य सरकार के मंत्री और पूरा प्रशासनिक अमला दशहरा मैदान में जुटा हुआ था. हालाँकि शिवराज ने अगले ही दिन अपना उपवास यह कहकर तोड़ किया की पुलिस गोलीबारी में मारे गये किसानो के परिजनों ने उनसे उपवास तोड़ने का आग्रह किया है.

इस दौरान शिवराज ने बेहद भावुक भाषण देते हुए कहा की मैं अभिभूत हूँ , कल जब मैंने वो द्रश्य देखा , जिस परिवार के बच्चो की मृत्यु हुई, वो परिवार वाले मेरे पास आये और उन्होंने द्रवित होकर कहा की ठीक है चले गए हमारे बेटे, लेकिन इतना जरुर कर देना की जो अपराधी है उन्हें सजा मिल जाये. लेकिन तुम उपवास से उठ जाओ, तुम हमारे गाँव जरुर आना. शिवराज के इस भाषण से लगा की उन्होने पीड़ित परिजनों के आग्रह पर अपना उपवास तोडा.

लेकिन जब एबीपी न्यूज़ ने इस मामले की पड़ताल करनी शुरू तो कुछ चौकाने वाली सच्चाई बाहर आई. एबीपी न्यूज़ के संवादाताओ ने उन परिवारों से मुलाकात की जिनके बारे में कहा गया की वो शिवराज से मिलने भोपाल गए थे. इसके अलावा उस दावे की भी पड़ताल की गयी की क्या वाकई में पीड़ित परिवार के सदस्यों ने शिवराज से उपवास तोड़ने का आग्रह किया था?

इस पड़ताल में एबीपी न्यूज़ संवादाता ने मृतक पूनमचंद पाटीदार के परिवार वालो से पुछा की क्या वो शिवराज से मिलने भोपाल गया थे? इसी बीच मृतक बबलू के रिश्तेदार ने कहा की वो ऐसा बना रहे है की मृतक के परिवार जन शिवराज के पास उनका उपवास तुडवाने के लिए गए थे, लेकिन ऐसा कुछ नही है. हम क्यों कहेंगे तुम उपवास तोड़ो, तुम बैठे रहो, 10 दिन, महीने या फिर साल.

इस दौरान एक मृतक किसान के परिवार ने एबीपी संवादाता को बताया की जब वो भोपाल पहुंचे तो मुख्यमंत्री के पीए राधेश्याम ने कहा की तुम्हे मुख्यमंत्री से मिलकर किसी मुआवजे या नौकरी की बात नही करना. बस यह कहना की वो आपका उपवास खत्म करवाने आये है. एबीपी की पड़ताल के बाद यह बात सामने आई की सभी मृतक किसानो के परिवार वालो को उस दिन ही भोपाल चलने के लिए कह दिया गया जिस दिन शिवराज ने उपवास की घोषणा की थी. जिससे यह स्पष्ट होता है की उपवास पर बैठने से पहले ही शिवराज ने उसको तोड़ने का इंतजाम कर लिया था.