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दिल्ली के सरकारी स्कूलों की केजरीवाल ने की कायाकल्प , 900 बच्चो ने निजी स्कूल छोड़ लिया सरकारी स्कूल में एडमिशन

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नई दिल्ली | हमारे देश में जिधर देखो , शिक्षा के नाम का बाजार सजा हुआ है. हर जगह निजी स्कूल , कॉलेजों की बाढ़ आई हुई है. फ़िलहाल हालात ऐसे है की देश में एजुकेशन एक इंडस्ट्री बन चुकी है जिसमें उधोगपति से लेकर राजनेता तक खूब निवेश कर रहे है. इसका कारण यह है की हर कोई अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देना चाहता है और सरकारी स्कूलों की हालत बद से बदतर हो चुकी है. जबकि किसी भी सरकार की नियत इन स्कूलों की हालत ठीक करने की नही है.

आखिर होगी भी क्यों, निजी स्कूल, कॉलेज या तो बड़े उधोगपतियो के है जिनसे सत्तधारी पार्टी को भारी भरकम चंदा मिलता है या फिर इन्ही बड़े राजनेताओ के है जो सत्ता में बैठे है. लेकिन दिल्ली में केजरीवाल सरकार बनने के बाद यह मिथक भी टूटने लगा है. उनके प्रयास से दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत में अप्रत्याशित तौर पर सुधार हुआ है. कुछ मामलो में तो सरकारी स्कूल, निजी स्कूलों को जबरदस्त टक्कर दे रहे है.

जितने भी नए सरकारी स्कूल बनाये गए है उनकी बिल्डिंग देखकर कोई नही कह सकता की ये सरकारी स्कूल है. इसके अलावा इन स्कूलों में वो सब सुविधाए दी जा रही है जो किसी निजी स्कूल में देखने को मिलती है. स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा सरकार ने पढ़ाई की गुणवत्ता बढाने पर भी ध्यान दिया है. इसके लिए स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षको को ट्रेनिंग के लिए विदेश भी भेजा गया है. इसके अलावा हर सरकारी स्कूल में ज्यादातर विषयो की उन्नत लैब भी बनायी गयी है.

यह केजरीवाल सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है की आज दिल्ली के बच्चे निजी स्कूलों की जगह सरकारी स्कूल में एडमिशन लेना पसंद कर रहे है. अभी रोहिणी के सेक्टर 21 में बने नए सर्वोदय विधालय में करीब 900 बच्चो ने एडमिशन लिया है. इन बच्चो ने निजी स्कूलों को दरनिकार करते हुए सरकारी स्कूल को चुना है. इससे उनके परिजन भी काफी खुश है क्योकि उनके बच्चो को कम फीस में अच्छी शिक्षा मिल रही है.

यह स्कूल इसी साल अप्रैल में शुरू किया गया है. जबकि केवल तीन महीने के अन्तराल में ही इस स्कूल में करीब 1200 बच्चे दाखिला ले चुके है. दरअसल केजरीवाल ने शपथ लेने के साथ ही अपनी प्राथिमिकता बताते हुए कहा था की उनका लक्ष्य सरकारी स्कूलों और सरकारी अस्पतालों की स्थिति में सुधार लाना है. फ़िलहाल उनकी मेहनत का फल दोनों जगह दिखाई दे रहा है. केजरीवाल सरकार के इस काम से एक बात जरुर स्पष्ट हो जाती है की अगर सरकारी की नियत सही है तो वो किसी भी क्षेत्र का कायाकल्प कर सकती है.