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बस के सीट कवर से पकडे गए निर्भया केस के सभी आरोपी, जानिये पूरी जांच पड़ताल की कहानी

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नई दिल्ली | साढ़े चार साले पहले 16 दिसम्बर की रात को कौन भूल सकता है जब दिल्ली की एक बस में पुरे देश को झकझोर देने वाली घटना हुई. एक लड़की के साथ चलती बस में बर्बरता के साथ गैंगरेप किया गया और फिर मरने के लिए नंगे बदन सड़क पर फेंक दिया गया. गैंगरेप के दौरान निर्भया के साथ कितनी हैवैनियत की गयी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसे दूसरी दुनिया की घटना करार दिया.

इस पुरे मामले में अदालतों को त्वरित सुनवाई की हर तरफ तारीफ हो रही है लेकिन जिस विभाग की वजह से यह मुमकिन हो सका उसके बारे में बहुत कम चर्चा हो रही है. हालाँकि स्पेशल ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इस विभाग की तारीफ की है. हम बात कर रहे है दिल्ली पुलिस की. दिल्ली पुलिस ने जिस तेजी के साथ इस मामले को सुलझाया था वो काबिले तारीफ था.

दिल्ली पुलिस ने इस पुरे मामले को 72 घंटे के अन्दर सुलझाकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. मामले की जाँच कर रही पुलिस अधिकारी छाया शर्मा ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए 100 पुलिस कर्मियों की कई टीम गठित की थी. उस समय दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार थे. उन्होंने बताया की हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों को पकड़ने की थी क्योकि निर्भया और उसके दोस्त आरोपियों को पहचानते नही थे.

मामले की जांच कर रही छाया शर्मा ने बताया की हमें निर्भया के बयान से काफी मदद मिली. उसने हमें बताया की बस की सीट का रंग लाल था और उस पर पीले रंग के कवर चढ़े हुए थे. इसके अलावा बस पर यादव लिखा हुआ था. पूरी दिल्ली में बिना नम्बर के बस को ढूँढना बड़ी चुनौती थी. इसलिए निर्भया के बयान के आधार पर 300 बसों को शोर्ट लिस्ट किया गया. वसंतकुंज इलाके के सीसीटीवी को कंघाला गया.

छाया ने बताया की इससे भी कोई सुराग नही मिला. तभी दिल्ली के बाहरी इलाके में खडी हुई एक बस के बारे में जानकारी मिली. यह वही बस थी. तब हमने अंदाजा लगाया की आरोपी बस की लोकेशन के आस पास ही होंगे. हमने 18 घंटे के अन्दर बस के ड्राईवर राम सिंह को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसके भाई मुकेश को गिरफ्तार किया गया. जुवेनाइल को आनंद विहार बस स्टेशन से गिरफ्तार किया गया.

फ़िलहाल छाया मिजोरम में पोस्टेड है. वो यहाँ राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग के साथ काम कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छाया ने कहा की जब मैं निर्भया से मिलने से अस्पताल गयी तो उसने मुझसे कहा की दोषियों को छोड़ना मत. अगर आज दोषियों को सजा मिली तो इसका कारण निर्भया की इच्छाशक्ति थी. बताते चले की निर्भाया ने 13 दिन बाद 29 दिसम्बर को सिंगापूर में दम तोड़ दिया था.