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जनवरी से जुलाई के बीच गयी 30 लाख लोगो की नौकरी, बेरोजगारों में नौकरी ढूँढने का घट रहा क्रेज

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नई दिल्ल्ली | 21वी शताब्दी के भारत में ज्यादातर लोगो का सपना है की उनको पढने लिखने के बाद एक अच्छी नौकरी मिल जाये. इसका सबसे बड़ा कारण यह है की खेती बाड़ी के लिए जमीने सिकुड़ती जा रही है और अपना व्यवसाय करने के लिए बहुत पैसो की जरुरत पड़ती है. इसलिए लोग नौकरी करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते है. लेकिन हमारे देश में नौकरी पाना इतना भी आसान नही है. करोडो बेरोजगार लोग लम्बी लाइन लगाए हुए खड़े है. न निजी क्षेत्र और न ही सरकार इन बेरोजगारों को नौकरी दे पाने में सक्षम नजर नही आ रही है.

यही कारण है की 2014 के लोकसभा चुनावो में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और वादा किया की उनकी सरकार बनने के बाद हर साल 1 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी दी जाएगी. अब मोदी सरकार बने तीन साल हो चुके है लेकिन कितनो बेरोजगारों को नौकरी दी गयी यह सबको पता है. विपक्ष पहले ही इस मुद्दे को लेकर सरकार को सदन और सड़क पर कई बार घेर चुकी है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक पिछले सात महीने में देश के अन्दर 30 लाख लोगो की नौकरी चली गई.

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक देश में फ़िलहाल जनवरी 2017 तक करीब 40.84 करोड़ लोगो के पास रोजगार था. जो जुलाई 2017 तक घटकर 40.54 करोड़ रह गए. इसका मतलब केवल सात माह के अन्दर करीब 30 लाख लोगो का रोजगार छीन गया. हालाँकि इसी रिपोर्ट में यह दावा किया गया की बेरोजगारों में नौकरी ढूँढने का क्रेज घटा है. इसी जनवरी तक करीब 2.59 करोड़ लोग नौकरी की तलाश में थे.

जो जुलाई 2017 में घटकर 1.37 करोड़ रह गयी. अब इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है की यह खबर देश के लिए दिलासा देने वाली है या चिंता में डालने वाली. क्योकि अगर लोग नौकरी की चाह न रखकर अपना व्यवसाय अपना रहे है तो अच्छी बात है लेकिन अगर बेरोजगारों ने इस बात की आस ही छोड़ की उन्हें नौकरी नही मिलेगी तो हो सकता है की वो अपराध के क्षेत्र में भी कूद जाये. जो देश के लिए सही खबर नही है.