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पाकिस्तान में नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और जबरदस्ती धर्मांतरण का आरोप, मचा बवाल

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इस्लामाबाद | पाकिस्तान में गाहे बगाहे अल्पसंख्यक हिन्दुओ के धर्मांतरण की खबरे सामने आती रहती है. इसके अलावा बहुसंख्यक मुस्लिम समाज पर जबरदस्ती हिन्दू लडकियों के अपरहण के भी आरोप लगते रहते है. इन्ही बातो को मद्देनजर रखते हुए वहां की नवाज सरकार ने हिन्दू मैरिज एक्ट को मंजूरी दे दी और 18 साल से कम किसी भी लड़की के धर्मांतरण पर रोक लगा दी.

लेकिन कानून बनने के बाद भी वहां इस तरह की घटनाओ पर रोक नही लगी है. दक्षिण-पूर्व सिंध प्रान्त में रहने वाले एक हिन्दू परिवार ने आरोप लगाया है की 6 जून को उनकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर लिया गया और जबरदस्ती उसका धर्मांतरण कराया गया. इस घटना के बाद से ही इस इलाके में तनाव फैला हुआ है. हालाँकि पाकिस्तान के अख़बार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार एक अलग ही कहानी निकलकर सामने आती है.

दरअसल दक्षिण-पूर्व सिंध प्रान्त के वनहरो गाँव के सैयद टोले में रहने वाले सतराम दास मेघवार ने आरोप लगाया की सैयद समुदाय के प्रभावशाली लोगो ने उनको नींद की गोली खिलाकर उनकी नाबालिग बेटी रविता का अपहरण कर लिया. सतराम का यह भी आरोप है की इन्होने इसकी रिपोर्ट थार पुलिस स्टेशन में भी करायी लेकिन उन्होंने तब तक उनकी बेटी का पता नही लगाया जब तक उसका धर्मांतरण नही हो गया.

हालाँकि डॉन अख़बार का कहना है की गुरुवार को रविता मीडिया के सामने आई और उसने बताया की उसका अपहरण नही हुआ था बल्कि वो अपनी मर्जी से नवाज अली शाह के साथ भागी थी. इसके अलावा उसने उमरकोट जिले के समर्रो कस्बे के इस्लामी उपदेशक पीर मोहम्मद अयूब जान फारूकी की मौजूदगी में इस्लाम अपनाया और शाह से निकाह किया. इस दौरान रविता ने अपनी और अपने पति की सुरक्षा की गुहार भी लगायी.

उधर मौलवी ने रविता और शाह के निकाह का प्रमाण पत्र सामने रखा है. प्रमाण पत्र के मुताबिक रविता 18 साल की है और अपनी पसंद के लड़के से निकाह कर सकती है. इसके अलावा प्रमाण पत्र में रविता का इस्लामी नाम गुलनार बताया गया है. लेकिन रविता के प्राथमिक स्कूल के प्रमाण पत्र से इस बात की पुष्टि होती है की उसकी उम्र 16 वर्ष है. इसलिए हिन्दू मैरिज एक्ट के अनुसार 18 साल की उम्र से पहले उसका धर्मांतरण नही किया जा सकता.