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जानिये मैजिक मीठी मिश्री का , सरदर्द से लेकर दस्त तक में है फायदेमंद

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पोर्शिया | मिश्री या रॉक शुगर क्रिस्टलों का रूप है और इसकी उत्पत्ति भारत में ही हुई है. इसे हिन्दुओ द्वारा देवी-देवताओ ओ भोग लगाने या प्रसाद के रूप में बांटने में भी प्रयोग किया जाता है. विशेष रूप से भगवान् कृष्ण को मक्खन के साथ मिश्री खाने का बड़ा शौंक था. आपको शायद यह नही पता होगा की कई प्रकार की मिठाइयो में इस्तेमाल होने वाली यह स्वीट कैंडी , कई स्वास्थ्य लाभों से भी भरपूर है. आइये जानते है मिश्री आपके स्वास्थ्य लाभ में कैसे लाभदायक है.

  • खांसी में आराम- बदलते मौसम में बच्चो को खांसी जुखाम होने एक आम बात है. वैसे तो खांसी से बचने के लिए कफ सिरप का इस्तेमाल किया जाता है परन्तु तुरंत आराम के लिए मिश्री का प्रयोग भी किया जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व गले इकठ्ठा हुए कफ को साफ कर खरास को दूर करने में सहायक है.
  • गले की सुजन – तिल, नील कमल, घी , मिश्री, दूध और शहद को बराबर मात्रा में लेकर मिला ले और इसको मुंह में रखकर चूसने से गली की सूजन दूर हो जाती है.
  • मौत फ्रेशनर- सौंफ के साथ मिश्री का प्रयोग मौत फ्रेशनर के रूप में किया जाता है. यह आपको फ्रेश रखने के साथ साथ आपके मुंह के अन्दर बनने वाले बैक्टीरिया की भी रोकथाम करती है.
  • सिरदर्द- 10 ग्राम मिश्री को 10 ग्राम सांप की केंचुली में अच्छी तरह से घोंटे और एक शीशे में रख ले. लगभग 1 ग्राम के चौथे हिस्से की मात्रा को बताशे में भरकर रोगी को खिला दे और ऊपर से 3-4 घूँट पानी पिला दे. ऐसा करने से पुराने से पुराना सिरदर्द दूर हो जाता है.
  • नकसीर- 50 ग्राम सूखे हुए कमल के फूल 50 ग्राम मिश्री लेकर पीसकर चूर्ण बना ले. इस चूर्ण में से 1 चम्मच चूर्ण को गर्म दूध के साथ एक हफ्ते तक ले. नकसीर का रोग दूर हो जाएगा.
  • आँख आना- 6 ग्राम से 10 ग्राम महात्रिफला में मिश्री मिलाकर सुबह शाम रोगी को देने से आँख की जलन, आंख लाल, आँख की पलक की सूजन,रौशनी की और देखने से जलन होना आदि रोग दूर हो जाते है, अगर त्रिफला के पानी से आँखों को धोये तो भी आराम मिलता है.
  • दस्त-दस्त के रोगी को 80 ग्राम मिश्री, 80 ग्राम कैथ, 30 ग्राम पीपल, 30 ग्राम अजमोद, 30 ग्राम बेल की गिरी, 30 ग्राम धाय के फूल, 30 ग्राम अनार दाना, 10 ग्राम कालानमक, 10 ग्राम नागकेसर, 10 ग्राम पीपलामुल , 10 ग्राम नेत्रवाला, 10 ग्राम इलायची. इन सभी को एक साथ लेकर बारीक पीस ले. इस मिश्रण को किसी कांच की शीशी में रख ले. जब भी दस्त लगे , इसमें से 2 चुटकी चूर्ण , मट्ठा के साथ लेने से दस्त में आराम मिलता है.