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मोदी सरकार की नीतियों की वजह से चमड़ा उधोग हुआ ठप , मुस्लिम व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित

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नई दिल्ली | हाल फिलहाल में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लिए गए कुछ आर्थिक फैसलों ने चमड़ा उधोग पर विपरीत असर डाला है. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के बूचडखानो को बंद करने के आदेश के बाद चमड़ा उधोग पहले ही बुरी स्थिति से गुजर रहा जो केंद्र सरकार की नीतियों से और गर्त में चला गया. मिली जानकारी के अनुसार भारत में चमड़े के जूते का निर्यात 13 प्रतिशत तक गिर चूका है. यह चिंता का विषय है.

बताते चले की भारत में चमड़ा उधोग से सबसे ज्यादा मुस्लिम व्यापरी जुड़े हुए है. इसलिए योगी सरकार की बूचडखानो पर की गयी कार्यवाही का सबसे ज्यादा असर भी मुस्लिम व्यापरियों पर पड़ा है. समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार विश्व के अग्रणी ब्रांड एचएंडएम, इंडीटेक्स के स्वामित्व वाले ज़ारा और क्लार्क्स ने भारत से अपने आर्डर वापिस लेने शुरू कर दिया है जबकि चीन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान को नये आर्डर जारी कर दिए है.

शौमेर पार्क एक्स्पोर्ट्स समूह के मुखिया नजीर अहमद ने रायटर्स से बात करते हुए बताया की आगरा चमड़े के जूते बनाने का सबसे बड़ा हब है. लेकिन मई में मोदी सरकार के मवेशियों पर लगाये गए प्रतिबंध के बाद यह कारोबार बेहद प्रभावित हुआ है. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी थी लेकिन गौरक्षको के डर से कोई भी अपनी जान जोखिम में डालने के लिए तैयार नही है. जबकि यह क्षेत्र अनौपचारिक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भर करता है.

चमड़ा उधोग पर पड़े इस प्रतिकूल प्रभाव से काफी लोगो की नौकरिया जाने का खतरा पैदा हो गया है. बताते चले की भारत चमडे के जूते और कपड़ो का सबसे बड़ा सप्लायर है. लेकिन इस वित्त वर्ष में यह करीब 3.2 फीसदी घट चूका है. एक आंकड़े के अनुसार मार्च 2016-17 में विदेशों में बिक्री घटकर 5.7 अरब डॉलर रह गयी है. इसके अलावा फुटवेयर निर्यात अप्रैल-जून में 4 प्रतिशत से अधिक गिरकर 674 मिलियन डॉलर का रह गया है.