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अन्तराष्ट्रीय संस्था का दावा, बैंकों में वापिस आये 97 फीसदी पुराने नोट, नोट बंदी हुई फेल

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नई दिल्ली | नोट बंदी की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था की यह फैसला गरीबो के हितो को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है. सरकार के इस कदम से कालाधन, आंतकवाद और भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, गरीबो के पैसे उन तक पहुंचेगे. नोट बंदी से सरकार के पास इतने पैसे आ जायेंगे की वो इनका इस्तेमाल गरीबो के हितो में कर सकेंगे.

मोदी सरकार के फैसले से करीब 86 फीसदी करेंसी चलन से बाहर हो गयी. करीब 15 लाख करोड़ रूपए के 500 और 1000 के नोट सरकार ने बंद कर दिए. सरकार को उम्मीद थी की नोट बंदी से 10 लाख करोड़ रूपए वापिस बैंकों में आ जायेंगे. इससे सरकार को 5 लाख करोड़ रूपए राजस्व के रूप में प्राप्त होंगे. लेकिन यह सब एक अंदाजा ही साबित हुआ.

अन्तराष्ट्रीय संस्था ब्लूमर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार के दावों के बावजूद नोट बंदी फ़ैल हो गयी है. रिपोर्ट में कहा गया की बंद किये गए 500 और 1000 के 97 फीसदी नोट बैंकों में वापिस आ चुके है. ब्लुमर्ग ने बताया की नोट बंदी के की आखिरी तारीख 30 दिसम्बर तक बैंकों में करीब 14 लाख 97 हजार करोड़ रूपए वापिस आ गए. जो चलन से बाहर किये गए नोटों का 97 फीसदी है.

ब्लुमर्ग ने नोट बंदी को फ़ैल बताते हुए लिखा की सरकार ने जिस लक्ष्य के साथ नोट बंदी लागु की थी वो सफल नही रही. ब्लुमर्ग के अलावा सेण्टर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMII) ने भी नोट बंदी को फ़ैल करार दिया है. CMII के अनुसार नोट बंदी के बाद भारत में को मिलने वाले निवेश प्रस्ताव में 61 फीसदी की कमी आई है. नोट बंदी से पहले औसतन 2097 प्रस्ताव रोज आते थे जो नोट बंदी के बाद घटकर 824 प्रस्ताव पर आ गए.